Sunday, March 29, 2009

पुरैकरङ्गेश्वनटादरेण सामाजिकान्मोदयितान्पुरसथान्
तयोर्विवाहोत्सवनाचकस्य कंसः किSलाशोभत सूत्रधारः
मथुरापुरी रंगमंच मंदिर,
में विवाह का उत्सव सुंदर ।
अश्व सजीले थिरक रहे हैं,
पुरस्थ जन उत्सव दर्शक है ।
वसुदेव इस नाटक के नायक
देवकी साक्षात नायिका मानक
इस विवाह उत्सव नाटक का
सूत्रधार बन कंस सुशोभित
आज मथुरा नगरी में देवकी वसुदेव के विवाह का उत्सव है । कवि कह रहे हैं कि इस नाटक की रंगभूमि
सुंदर सजी हुई मथुरा नगरी है । नाटक के नायक हैं वसुदेव और नायिका का मानो मानक ऐसी देवकी हमारी नायिका है और कंस हैं इस नाटक के सूत्रधार ।

2 comments:

सतीश सक्सेना said...

पहली बार आपका यह महान कार्य देखा है ! आपका नाम अमर रहेगा .....
मेरी शुभकामनायें !

kishor kumar khorendra said...

main padh raha hun

bahut sundar hain ..